Sunday, 15 April 2007

क्या हमारे साथ चलेंगे ?


आप माफ़ करते रहें तो हम खता करते रहें
कभी पलकों को चूम लें तो कभी जुल्फों से खेलते रहें
आप इकरार कर ले तो हम वफ़ा कर ते रहें
कभी दिल कि बात करें तो कभी जान पे खेलते रहें
तुम आने का वादा करो तो हम इंतज़ार करें
कभी सपनो में मिल लें तो कभी राहों को देखते रहें
आप मोहब्बत कर लें हम से तो क्यों हम और कुछ करें
तेरे हाथों को थाम कर यूं ही उम्र भर चलते रहें ॥


(genuinely uttams)

1 comment:

Anonymous said...

Very Nice
Uttam Ji,

Nacheez's.........

दिल के दर्द कभी होठों पे भी आ जाते हैं,

आखिर दिल और होठों में गहरा दोस्ताना है ।